Data kya hai

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दोस्तों आपने अपने निजी या प्रोफेशनल लाइफ में कई बार डाटा का नाम सुना होगा। लेकिन क्या आप जानते है, Data Kya Hai. अगर नहीं तो आपको यह आर्टिकल जरूर पढ़ना चाहिए। आमतौर पर हम डेटा को एक आवश्यक जानकारी के रूप में जानते है, जो टेक्स्ट, इमेज, ऑडियो, वीडियो किसी भी रूप में हो सकती है। यह किसी कागज पर लिखी हुई भी हो सकती है या किसी सिस्टम में सेव भी हो सकती है। इस आर्टिकल में डाटा से सम्बन्धित सभी बातों जैसे डाटा क्या है, डेटा का महत्व, डेटा के प्रकार, डेटा कैसे स्टोर किया जाता है, आदि के बारे में बताया गया है। इसके साथ ही हमने Data Processing kya hai और डाटा प्रोसेसिंग प्रक्रिया के basic stages और methods के बारे में भी बताया है। इन सबसे पहले आइये जानते है, कि Data Kya Hota Hai

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डेटा की परिभाषा क्या है (Definition of Data in Hindi)

कम्प्यूटिंग में, डेटा वह जानकारी है, जिसे कम्प्यूटर और ट्रांसमिशन मीडिया के जरिये डेटा बाइनरी डिजिटल रूप में परिवर्तित किया जाता है और इसका अनुवादित रूप प्रसंस्करण के लिए कुशल होता है।

डाटा क्या है (What is Data in Hindi)

Data एक प्रकार की information जानकारी होती है जो किसी व्यक्ति या मशीन द्वारा communication या interpretation करने के लिए एक उपयुक्त फॉर्मेट में formalized होती है। डाटा text, numbers, pictures, sound, video या फिर character किसी भी रूप में हो सकता है। डाटा को दर्शाने के लिए alphabets (A-Z, a-z), digits (0-9) और special characters (+,-,/,*,<,>,=) इत्यादि का यूज किया जाता है। इन सभी का उपयोग करके कोई ऐसी जानकारी एकत्रित करना जिसका कोई उपयुक्त अर्थ निकलता हो डाटा कहलाता है। जब तक कोई जानकारी सही रूप से व्यवस्थित नहीं रहती उसे डाटा नहीं कह सकते है और न ही वह किसी काम का होता है।

साधारण शब्दों में कहें तो यह एक प्रकार का रूपांतरण रिकॉर्ड है, जिसे कम्युनिकेशन के जरिये कोई जानकारी साझा की जाती है। इस प्रकार किसी प्रोफेशनल डाटा को इंफॉर्मेशन कहा जाता है। डेटा में उपस्थित जानकारी एकवचन या बहुवचन के रूप में हो सकती है। डाटा कम्प्यूटर या मोबाईल के सी॰ पी॰ यू॰ मेमोरी में एक स्थान पर संग्रहित किया जाता है, इसे स्थान को मैमोरी कहा जाता है। डाटा किसी भी तरह की सूचना हो सकती है, केवल कम्प्यूटर में उपस्थित सूचना ही डेटा नहीं होती है, किसी कागज पर उपस्थित सूचना को भी डेटा कह सकते है।

डाटा का इतिहास

सन् 1940 में पहली बार “डाटा” शब्द का उपयोग अंग्रेजी भाषा में किया गया। जबकि “ट्रांसमिसिबल और स्टेलेबल कम्प्यूटर सूचना” के क्षेत्र में “डेटा” शब्द का पहली बार सन् 1946 में किया गया। पहला हार्ड ड्राइव सन् 1956 में आईबीएम द्वारा जारी की गई। इस हार्ड ड्राइव का उपयोग IBM 305 RAMAC सिस्टम में किया जाता था। इस हार्ड ड्राइव की स्टोरेज क्षमता 5 MB थी। पहली फ्लॉपी डिस्क भी सन् 1971 में आईबीएम द्वारा जारी की गई थी। इसकी स्टोरेज क्षमता 80 KB की थी। सन् 1996 में जेम्स रसेल ने कॉम्पैक्ट डिस्क (सीडी) का अविष्कार किया जिसे सन् 1970 में पेटेंट प्रदान किया गया था।

डाटा का महत्व क्या है?

डाटा का मतलब कोई भी सूचना, आंकड़े अथवा अन्य किसी भी प्रकार के ज्ञान से होता है। डाटा में उपस्थित हर शब्द का अपना एक अलग अर्थ होता है। इसलिए डेटा किसी भी चीज जैसे कोई तथ्य, निदृष्ट सिद्धांत, व्यक्ति, वस्तु अथवा स्थान इत्यादि का एक विवरण होता है, जो सम्बन्धित तथ्य के बारे में सटीक जानकारी देने में एक महत्वपूर्ण भुमिका निभाता है।

डाटा कितने प्रकार के होते है (Types of Data in Hindi)

डाटा कई प्रकार का होता है, जो नीचे निम्नलिखित रूप से दिया गया है।

1. संख्यात्मक डाटा (Numerical Data)

संख्यात्मक डाटा में संख्या के आधार पर डाटा तैयार किया जाता है। इसमें 0 से 9 तक की संख्या के नम्बर का उपयोग किया जाता है। माइक्रोसॉफ्ट एक्सेल में तैयार की गई एक्सेल शीट इसी का उदाहरण है।

2. अक्षर डाटा (Alphabetic Data)

अक्षर या अल्फाबेट डाटा को हिंदी की वर्णमाला (क, ख, ग) या इंग्लिश के अल्फाबेट (A, B, C) वर्ड के आधार पर तैयार किया जाता है।

3. चिन्हात्मक डाटा (Alpha Numeric Data)

चिन्हात्मक डाटा में अधिकतर चिन्हों जैसे @, #, $ आदि का उपयोग किया जाता है।

4. ऑडियो डाटा (Audio Data)

ऑडियो डाटा में ध्वनि रिकॉर्ड करके सेव किया जाता है। कम्प्यूटर में ऑडियो फॉर्मेट को डाटा के रूप में स्टोर करने के लिए MP3 व WAV फॉर्मेट का इस्तेमाल होता है।

5. विडियो डाटा (Video data)

विडियो डाटा में वीडियो के फॉर्मेट में सेव होता है। कम्प्यूटर में सेव होने वाली वीडियो फॉर्मेट के डाटा MP4 और MKV फॉर्मेट का इस्तेमाल किया जाता है।

6. ग्राफिकल डाटा (Graphical Data)

ग्राफिकल डाटा में Images, pictures आदि को शामिल किया जाता है। इन्हें ग्राफिक्स और एनिमेशन के माध्यम से तैयार किया जाता है। कम्प्यूटर में JPG, PNG फॉर्मेट का इस्तेमाल किया जाता है।

डेटा कैसे स्टोर किया जाता है (How data is stored)

कम्प्यूटर में सेव किया जाने वाला इंटरनल स्टोरेज डिवाइस की थर्ड पार्टी ड्राइव के अंदर स्टोर किया जाता है। इस डेटाफार्मेट को स्टोर करने के लिए स्टोरेज डिवाइस या हार्ड ड्राइव का इस्तेमाल किया जाता है। डाटा को कम्प्यूटर में सेव करने के लिए डाटा को अलग-अलग फॉर्मेट का उपयोग किया जाता है। किसी सिस्टम में स्टोर किये जाने वाले डाटा को मुख्य रूप से दो कैटेगरी के आधार पर स्टोर कर सकते है। यह दो कैटेगरी निम्नलिखित है।

1. Permanent Storage

परमानेंट अर्थात् स्थाई स्टोरेज में सारा डाटा स्थाई रूप से सुरक्षित तरीके से स्टोर रहता है। इसलिए यह डाटा को स्टोरेज करने के लिए सबसे अच्छा तरीका माना जाता है। कम्प्यूटर का इंटरनल स्टोरेज ही परमानेंट स्टोरेज कहलाता है। इसके लिए Hard disk/ Hard drive का उपयोग किया जाता है। स्थाई स्टोरेज किसी डाटा को उस समय तक स्टोर करके रखता है, जब तक कि आप खुद उस डाटा को डिलीट न कर दें।

2. Temporary Storage

टेम्परेरी अर्थात् अस्थाई स्टोरेज में सारा डाटा अस्थाई रूप से स्टोर रहता है। इस प्रकार के स्टोरेज को Random Access Memory (RAM) के नाम से जाना जाता है। अस्थाई स्टोरेज में स्टोर डाटा तुरन्त ही डिलीट हो जाता है। उदाहरण के लिए आपने कोई डाटा एकत्रित किया और अचानक बिजली चले जाने पर वह सारा डेटा डिलीट हो जाता है, इस प्रकार का डाटा temporary storage कहलाता है। इस तरह के अस्थाई डाटा को CPU के द्वारा automatically तरीके से नियन्त्रित किया जाता है। अस्थाई स्टोरेज का उपयोग अधिकतर कम्प्यूटर एप्लीकेशन में किया जाता है।

डेटा पेशेवर डेटा विशेषज्ञ एक करियर के रूप में

आप चाहें तो एक डेटाबेस विशेषज्ञ के रूप में भी अपना करियर बना सकते है। डेटाबेस विशेषज्ञ बनने के लिए आपको आईटी की शाखा डेटाबेस एडमिनिस्ट्रेटर पेशा को चुनना होता है। डेटाबेस विशेषज्ञ का काम डेटा की डिजाइन करना, ट्यूनिंग करना, रखरखाव करना, उल्लिखित डेटा उपयोग और सुरक्षा नीतियों को पूरा होता है। छोटी से लेकर बड़ी हर प्रकार की कम्पनियाँ अपने डेटा के प्रबंधन हेतु पेशेवर डेटा प्रबंधक को नियुक्त करती है।

डाटाबेस क्या है (What is Database in Hindi)

DataBase एक प्रकार का उचित प्रकार से संग्रहित डाटा होता है। किसी भी डाटा को सही तरह से तैयार करने के लिए एक बेस की आवश्यकता होती है। एक व्यवस्थित डेटा बनाने के लिए Table, Column, Line, Pie, Bar, Area, Scatter, Charts जैसे कई प्रकार के structure का उपयोग किया जाता है। Microsoft Excel में बनने वाली टेबल इसी का एक उदाहरण है। इस टेबल में rows और columns होते है। इन rows और columns को typically record और field कहा जाता है।

Data Processing क्या है (What is Data processing in Hindi)

Data processing एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें किसी रॉ डाटा अर्थात शब्दों, नंबरों व चिन्हों को हेरफेर करके एक ऐसे जानकारी में कन्वर्ट किया जाता है, जिसका कोई अर्थ निकले। किसी चीज के उत्पादन में की जाने वाली प्रक्रिया की तरह ही डेटा प्रोसेसिंग की भी एक प्रक्रिया होती है। प्रोसेसिंग की इस प्रक्रिया में raw data को कम्प्यूटर सिस्टम अथवा सॉफ्टवेयर में input किया जाता है और उसे produce करके उसका output निकाला जाता है।

डाटा प्रोसेसिंग के मूल चरण क्या है (Basic Stages of Data Processing in Hindi)

Data Processing प्रक्रिया को तीन चरणों में बांटा गया है, यह सभी निम्नलिखित है।

Input

Raw data को कम्प्यूटर सिस्टम अथवा सॉफ्टवेयर में input किया जाता है। इस प्रक्रिया में सबसे पहले जानकारी इकट्ठा की जाती है और यह वेरिफाई किया जाता है कि सभी जानकारी सही है अथवा गलत। इसके बाद एकत्रित डाटा को Coding के माध्यम से Machine form में बदला जाता है, ताकि कम्प्यूटर आसानी से उस डेटा को समझ सके। फिर इसे कम्प्यूटर में स्टोर कर दिया जाता है। इसके बाद अगली स्टेज आती है।

Processing

डाटा प्रोसेसिंग की इस प्रक्रिया में input data को produce data में बदला जाता है। इस प्रक्रिया में डाटा को समूहों और उपसमूहों में बाटाँ जाता है। उदाहरण के लिए यदि डाटा किसी छात्र के परिणाम का हुआ तो इसे अलग-अलग विषयों के आधार पर अलग-अलग श्रेणी में बाँट दिया जाता है। फिर डाटा को जरूरत के हिसाब से Ascending या Descending Order में जमाया जाता है और arithmetic operation जैसे sum, average, percentage इत्यादि का उपयोग करके डाटा की कैलकुलेशन शॉर्ट और आसान बनाई जाती है, ताकि डाटा का विश्लेषण करने में आसानी हो। अंत में सम्पूर्ण डाटा की एक summarised report तैयार की जाती है। ताकि अगर कभी डाटा की जरूरत पड़े तो पूरे डाटा का विश्लेषण करने की आवश्यकता न पड़े केवल सारांश के आधार काम हो जाए। इससे समय और मेहनत दोनों बचता है।

Output

इस स्टेज में Processing स्टेज के सभी रिजल्ट को प्राप्त करके उसे Output result में कन्वर्ट किया जाता है। अधिकतर ऑउटपुट रिजल्ट को हार्ड डिस्क, pen drive, CD, DVD में कन्वर्ट किया जाता है। कई बार इसे कागज पर भी प्रिंट किया जाता है। आउटपुट किसी भी प्रकार के हो सकते है, Plain text file, Table/ Spreadsheet, Graphs and Charts, Image File or Maps.

डाटा प्रोसेसिंग करने के Methods क्या है (Methods of Data Processing in Hindi)

डाटा प्रोसेसिंग तीन तरह से की जाती है, जो कि निम्नलिखित है।

Manual

Data Processing की इस पद्धति में डेटा को मैन्युअल रूप से संसाधित किया जाता है। इसमें सभी कार्य मैन्युअल रूप से किये जाते है, इसके लिए किसी भी उपकरण या स्वचालन सॉफ्टवेयर का उपयोग नहीं किया जाता है।

Mechanical

Data Processing की Mechanical पद्धति में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और एक यांत्रिक उपकरण के जरिये डेटा को संसाधित किया जाता है, जैसे की कैलकुलेटर और टाइपराइटर की मदद से गणना करना।

Electronic

इलेक्ट्रॉनिक डेटा प्रोसेसिंग की आधुनिक तकनीक है और यह डेटा प्रोसेस करने का सबसे तेज तरीका भी है। इस पद्धति के द्वारा सटीक परिणाम प्राप्त होते है और यह अन्य पद्धति की तुलना में अधिक विश्वसनीय होती है। इस विधि में सॉफ्टवेयर व प्रोग्राम्स का उपयोग किया जाता है।

डाटा प्रोसेसिंग के प्रकार क्या है (Types of Data Processing in Hindi)

डाटा प्रोसेसिंग करने के लिए कई तकनीकें उपलब्ध है। काम की जरूरतों के हिसाब से डाटा प्रोसेसिंग करने के लिए इस तरीकों का चुनाव किया जाता है। यह सभी प्रकार निम्नलिखित है।

Batch Data Processing

Batch processing डाटा प्रोसेसिंग की सबसे सरल तकनीक है। इसमें बड़ी मात्रा में जमा डाटा को एक ही जगह में categories किया जाता है। बैच प्रोसेसिंग तकनीक से आवश्यकता पड़ने पर data anaysis करना आसान होता है और इससे समय की बचत भी होती है। बैच प्रोसेसिंग में डाटा को specific time में प्रोसेस करना होता है।

Real-Time Data Processing

Real-Time Processing को Online Processing भी कहा जाता है। यह डाटा प्रोसेसिंग की सबसे तेज तकनीक मानी जाती है। जब किसी रिकॉर्ड अथवा डाटा को तुरन्त अपडेट करना होता है, तो रियल टाइम प्रोसेसिंग का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया में सभी उपकरण सीपीयू के प्रत्यक्ष नियंत्रण में कार्य करते है। इस प्रक्रिया में यूजरर्स उन डेटा प्रविष्टि के बारे में पूछताछ कर सकते है, जो कंप्यूटर द्वारा संग्रहीत है। इनकी सफलता पूर्वगणना पर आधारित होती है।

ऑनलाइन प्रोसेसिंग प्रक्रिया बैच प्रोसेसिंग प्रक्रिया के बिल्कुल विपरीत है। इसमें प्रोसेसिंग प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और डाटा ऑन टाइम ही अपडेट होता रहता है। जैसे बैंक का डाटा तुरन्त ही अपडेट किया जाता है। इसी प्रकार बस, रेलवे, एयरलाइन ऑनलाइन टिकट बुकिंग में यदि कोई बुकिंग होती है या कोई टिकट कैंसिल होता है तो यह सभी डाटा तत्काल ही अपडेट करना होता है। इस तरह उन सभी क्षेत्रों के लिए जहाँ हर वक्त बदलाव होते रहते है, और हर समय अपने ग्राहकों को सही जानकारी देनी हो।

Distributed Data Processing

Distributed Processing (DDP) अर्थात् वितरित प्रसंस्करण डाटा प्रसंस्करण की सबसे जटिल तकनीकों से एक है। इस प्रक्रिया में बड़े डेटासेट को तोड़कर उन्हें अलग-अलग कम्प्यूटर्स या सर्वरों में संग्रहीत किया जाता है। इस प्रोसेसिंग प्रक्रिया में कार्यों को कई संसाधनों/मशीनों द्वारा साझा कर उनका समानांतर क्रम में निष्पादन किया जाता है। इसका उपयोग अन्य डेटा प्रोसेसिंग प्रणाली के कार्यों के बारे में पूछताछ करने में किया जाता है।

डाटा प्रसंस्करण की यह तकनीक पेशेवर उपयोगकर्ताओं को स्वयं के विशेष अनुप्रयोगों को विकसित करने में सहायता प्रदान करती है। साथ ही यह प्रणाली जटिल व असामान्य समस्याओं के समाधान की खोज करने में सक्षम होती है। अन्य डाटा प्रोसेसिंग प्रणालियों की तुलना में यह प्रोसेसिंग प्रक्रिया बेहद ही कम अवधि में होने के कारण इस प्रणाली में अधिक लागत आती है और गुणवत्ता व विश्वसनीयता भी कम पाई जाती है। अन्य डेटा प्रोसेसिंग प्रणाली की तुलना में इस प्रणाली में उपयोगकर्ता के डेटा की गोपनीयता का स्तर निम्न रहता है।

Statistical Data Processing

Statistical processing इसमें डाटा को Statistics (सांख्यिकी) के आधार पर तुलना की जाती है ताकि उसे समझने में आसानी हो। इस प्रक्रिया में भारी heavy number crunching होती है। ऐसी संस्थाएं जिन्हें सप्ताह या महीने के अंत के दिनों में ज्यादा काम रहता है, वह अधिकतर इसी प्रणाली का उपयोग करते है।

Time-Sharing Data Processing

Time-Sharing Processing को Multi-Processing के नाम से भी जाना जाता है। इस तकनीक में डिजिटल कंप्यूटर की सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट (सीपीयू) द्वारा अलग-अलग प्रोग्राम्स के साथ बड़े पैमाने पर मल्टीपल यूजर्स के साथ interact किया जाता है। एक ही डेटासेट पर एक ही समय में दो या दो से अधिक प्रोसेसर काम करते है। इसमें एक ही सिस्टम के भीतर कई प्रोसेसर रखे जाते है और उनके डेटा को अलग-अलग फ़्रेम्स में बांटा जाता है। फिर एक ही कंप्यूटर सिस्टम में प्रत्येक फ़्रेम को दो या दो से अधिक CPU द्वारा संसाधित किया जाता है, जहाँ यह सभी समानांतर काम करते है। सीपीयू अन्य उपकरणों (जैसे, प्रिंटर और वीडियो डिस्प्ले टर्मिनल) की तुलना में अधिक तेज होता है। इस कारण इनपुट/आउटपुट प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न असतत् समस्याओं को आसानी से हल किया जा सकता है और समस्या दर्ज होते ही तुरन्त उसका समाधान उपलब्ध हो जाता है।

Commercial Data Processing

वाणिज्यिक डाटा प्रोसेसिंग का मूल आधार मानक होता है। इस प्रक्रिया में एक व्यवसाय के डाटा प्रोसेसिंग के लिए कम्प्यूटर और वाणिज्य का उपयोग किया जाता है और साथ ही बैच प्रोसेसिंग प्रणाली का भी उपयोग किया जाता है। इस प्रणाली में कम कम्प्यूटेशनल ऑपरेशन का उपयोग कर बड़ी मात्रा के डेटा को इनपुट से आउटपुट में परिवर्तित किया जाता है। डेटा मानकीकृत होने के कारण इसमें त्रुटियों की सम्भावना बहुत कम रहती है।

Scientific Data Processing

वैज्ञानिक डाटा प्रोसेसिंग वाणिज्यिक डेटा प्रोसेसिंग के बिल्कुल विपरीत होती है। इसमें कम मात्रा के इनपुट को आउटपुट में परिवर्तित करने के लिए भी एक बड़े कम्प्यूटेशनल ऑपरेशन का उपयोग किया जाता है। इसमें मानकों की जगह अंकगणितीय और तुलना आधार पर काम किया जाता है और इसी कारण त्रुटियों की सम्भावना भी अधिक रहती है। त्रुटियों की सम्भावना अधिक होने के कारण डेटा को मान्य करने, क्रमबद्ध करने और मानकीकृत करने की प्रक्रिया बहुत सावधानी से की जाती है। किसी त्रुटि के कारण कोई गलत निष्कर्ष न निकले इसके लिए विभिन्न प्रकार की वैज्ञानिक विधियों का उपयोग किया जाता है। वैज्ञानिक डाटा प्रोसेसिंग में वाणिज्यिक डेटा प्रोसेसिंग की तुलना में अधिक समय लगता है।

Data और Information में अन्तर क्या है (Difference between Data and Information in Hindi)

Data और Information दोनों अलग-अलग चीजें है। इनमें बस थोड़ा सा अन्तर होने के कारण लोगों को यह एक जैसे लगते है। डाटा और इन्फॉर्मेशन में निम्नलिखित अन्तर है।

  • Data raw facts होते है और प्रोसेसिंग करने के बाद यह information का रूप ले लेते है।
  • डाटा इतना Specific नहीं होता है, जितनी कि इन्फॉर्मेशन।
  • डाटा Records होते है, जबकि इन्फॉर्मेशन एक प्रकार का refined data होता है।
  • डाटा Observations के ऊपर Based होता है, जबकि इन्फॉर्मेशन Analysis के ऊपर Based होती है।
  • डाटा Organized या Unorganized किसी भी फॉर्म में हो सकते है, लेकिन इन्फॉर्मेशन हमेशा Organized Form में होती है।
  • डाटा की जरूरत हमेशा नहीं रहती जबकि इन्फॉर्मेशन बहुत उपयोगी होती है।
  • डाटा पूरी तरह से uncategorized होते है, जबकि इन्फॉर्मेशन पूरी तरह categorized और well maintain होते है।
  • डाटा में text से ज्यादा numbers और characters का उपयोग किया जाता है, जबकि इन्फॉर्मेशन में अधिकतर text का उपयोग किया जाता है।
  • डाटा इन्फॉर्मेशन के ऊपर निर्भर नहीं होता है, जबकि डाटा इन्फॉर्मेशन का अत्यंत महत्वपूर्ण आधार होता है।

ऊपर बताई गई बातों के आधार पर आप डाटा और इन्फॉर्मेशन में अन्तर कर सकते है।

FAQ: डाटा से जुड़े सवाल-जवाब

Computer के किस भाग द्वारा डाटा इनपुट किया जाता है?

Computer में data input करने के लिए input devices जैसे keyboard, mouse, OCR, OMR आदि का उपयोग किया जाता है।

डिलीट हुए Memory data को वापस कैसे प्राप्त करें?

यदि आपके Memory card से डाटा delete हो जाता है तो इसे आप दुबारा प्राप्त कर सकते हैं। इसके लिए सबसे पहले आपको कम्प्यूटर में recovery software install करना होगा और फिर इस सॉफ्टवेयर के द्वारा आप अपना memory card को computer के साथ connect करके अपना डाटा रिकवर कर सकते है।

Conclusion

उम्मीद है, इस आर्टिकल को पढ़ने के बाद आपको समझ आ गया होगा कि Data Kya Hai और आपको डाटा से जुड़े सभी सवालों का जवाब मिल गया होगा। जैसा कि हमने बताया जरूरी नहीं है कि किसी सिस्टम में सेव जानकारी ही डाटा हो, कोई भी जरूरी जानकारी जो किसी काम आये, डाटा कहलाती है। अगर आपके मन में अभी भी डाटा से सम्बन्धित कोई सवाल हो, तो आप कमेन्ट करके पूछ सकते है। साथ ही यह भी बताए कि आपको हमारा यह आर्टिकल “डाटा क्या है” कैसा लगा और यदि जानकारी अच्छी लगी हो, तो इसे अपने दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर करे।

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